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Cute OMG

क्या आपको पता है कौन थे लाफिंग बुद्धा और क्या है उनका इतिहास,सच्चाई जानकर पैरो तले जमीन खिंसक जाएगी आपकी।

हम मार्किट जाते है और कही अगर लाफिंग बुद्धा मिल गए तो घर ले आते है जी हां अक्सर यही होता है किसी ने कह दिया तो उस से बड़ी मूर्ति , या छोटी मूर्ति मगर लगभग 100  में से 80  घरो लाफिंग  बुद्धा की एक फोटो जरूर ही राखी होती है ऐसे में क्या आपने कभी ये जानने की कोशिश करी की आखिर  लाफिंग बुद्धा की सभी तस्वीरो में इन्हे हस्ते हुए क्यों दिखाया जाता है नहीं ना , आपने कभी ये जानने का प्रयास किया की आखिर इसके पीछे क्या वजह हो सकती है की लाफिंग बुद्धा नाम से  विख्यात मूर्ति में आखिर ऐसा क्या ख़ास है जो इसकी जितनी भी तस्वीर या मूर्ति बने सभी में उन्हें हस्ते हुए दिखाया जाता है|  हो गए न हैरान जरा थोड़ा दिमाग लगाइये, थक गए ना चलिए इसके पीछे की अहम वजह हम आपको बताते है की आखिर क्या वजह है जिसके कारण लाफिंग बुद्धा को हर तस्वीर में हस्ते हुए ही दिखाया जाता है |

ये है सच्चाई

लियान डीनेसटी के वक्त बुद्धाये नाम के एक भिक्षु थे और उनका सही नाम क्विसई था परन्तु सब उन्हें बुद्धाये कहते थे। वे हमेशा अलग अलग गावों में घुमते रहते थे और बुद्ध के अनुसरण के कारण हमेशा बच्चो में खिलौने और मिठाईयां बांटते रहते थे। कहा जाता है की उनके पास भी सांता क्लास की तरह ही एक बड़ा सा झोला रहता था जिसे वो अपनी पीठ पर टांगकर चलते थे, उनका झोला कभी खाली नहीं रहता था ज़रूरतमंदों के लिए हमेशा उसमें कुछ न कुछ ज़रूर रहता था। बुद्धाये के जीवन का एक ही मकसद था, ख़ुशियां बांटना इसी वजह से बुद्धाये को पुताये भी कहा जाता था।

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क्या थे लार्ड बुद्धा

गौतम बुद्ध ने तत्कालीन रुढियों और अन्धविश्वासों का खंडन कर एक सहज मानवधर्म की स्थापना की। उन्होंने कहा की जीवन संयम, सत्य और अहिंसा का पालन करते हुए पवित्र और सरल जीवन व्यतीत करना चाहिए। उन्होंने कर्म, भाव और ज्ञान के साथ ‘सम्यक्’ की साधना को जोड़ने पर बल दिया, क्योंकि कोई भी ‘अति’ शांति नहीं दे सकती। इसी तरह पीड़ाओ तथा मृत्यु भय से मुक्ति मिल सकती है और भयमुक्ति एवं शांति को ही उन्होंने निर्वाण कहा है

हमेशा हस्ते मुस्कुराते रहते है

बुद्धा हमेशा से बेहद शांत , सोहाद्र भाव के रहे उन्होंने जीवन काल में सबकी मदद करी उनका मानना था की इंसान को देने वाले सुख से बड़ा कोई सुख नहीं , कोई इंसान अगर किसी इंसान के काम आ जाये इस से बड़ी बात कोई और हो ही नहीं सकती ऐसे में इंसान हमेशा इंसान के मदद आये ये सन्देश बौद्ध धर्म का था|  शांत रहना , खुश रहना और दुसरो को खुश रखना यही बौद्ध धर्म की शिक्षा थी|

एक ये भी था राज

जी हां दरसल कहा जाता है जैन धर्म के अनुसार एक ये  भी राज ही रह गया की जब उन्हें मृत्यु के बाद अग्नि पर रखा गया तो उनके शरीर को अग्नि पर रखते ही पटाखे से फूटने लगे जिसे देख कर सब अचंभित हो गए जिसके बाद सबको ये सीख मिली की लाफिंग बुद्धा जाते जाते भी सबको हंसा गए इसलिए ना कभी कोई ऐसी बात केहनी छाइये जो किसी को बुरी लगे ना कभी किसी के लिए गलत विचार रखने चाहिए बस सबको हसाते रहना ही जिंदगी है

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